बारां
बारां को प्राचीन वराह नगरी के नाम से जाना जाता है।बांरा कालीसिंध, पार्वती व परवन नदियों के बीच स्थित है। बारां का नामकरण : प्राचीन काल में 12 तालाब थे जिन्हें पाटकर नगर बसाया गया, जो बांरा कहलाया। नामकरण की अन्य किंवदिति : प्राचीन समय में इसके अन्तर्गत बारह गाँव आते थे, इसलिए यह क्षेत्र बांरा कहलाया।
शाहबाद किला
जंगलों के बीच छोटी सी पाहडी पर सिद्ध शाहबाद किला काफी प्राचीन है।1521 में चौहान वंशी धन्धेल राजपूत मुकुटमणि देव द्वारा बनाया गया यह किला हाडोती का सबसे मजबूत और बेहतरीन किला है। कुंडकोह की वादियों से घिरे इस किले में 18 तोपे है।इनके अलावा इस किले में तोपखाना, बरुदखाना और कई मंदिर बने हैं।यह किला बारां जिले के प्रमुख आकर्षणों में से एक है जो यह घने जंगलों, मैदानों और कुंड कोह घाटी से घिरा हुआ है।
शेरगढ़ किला
शेरगढ़ किला
बारां के पर्बन नदी के पास बना शेरगढ़ किला अपने प्राचीन जैन और ब्राह्मण मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यात्री इस किले में 790 ए.डी में बने कोश्वर्धन की पत्थर की प्रतिमा देख पायेंगे।सुर वंश के राजा शेरशाह द्वारा कब्जा करने के बाद इसका नाम शेरगढ़ पड़ा, इससे पहले इस किले का नाम कोषवर्धन था। 790 ईस्वी का एक शिलालेख शेरगढ़ किले समृद्ध इतिहास को व्यक्त करता है।
शाही जामा मस्जिद
शाहबाद में स्थित शाही जामा मस्जिद बरन से 80 कि.मी दूर है। इसका निर्माण मुग़ल सल्तनत के बादशाह औरंगजेब के शासन काल दौरान किया गया। विशाल स्तंभ और मेह्ब्स इस मस्जिद को बहुत सुन्दर और आकर्षक बनाते हैं जिन्हें देखने सैलानी इनकी और खींचे चले आते हैं।
शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य
शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य बारां जिले के शेरगढ़ में है। 98 वर्ग कि.मी में फैला यह अभयारण्य कई वन्यजीवों को आश्रय प्रदान करता है। पशु प्रमियों यहाँ भालू, शेर, चीता, जंगली सूअर, चिंकारा, लकड़बगह, साम्बा, चितल और हिरन देख पाएंगे।शेरगढ़ अभयारण्य बारां जिले से लगभग 65 किमी दूर शेरगढ़ गांव में स्थित है। यह अभयारण्य कई वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध है इसके साथ ही यह पौधों की कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है। शेरगढ़ अभयारण्य में आप कुछ शानदार फोटो भी क्लिक कर सकते हैं और यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
ककोनी, बारां जिले के छिपबरोड़ तहशील से केवल 85 कि.मी दूर है। परवान नदी के किनारे स्थित यह स्थान अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। 8वी सदी में बने जैन, शिव और वैष्णव मंदिर आज खंडर बन चुके है। ककोनी मंदिर की 60% मूर्तियाँ कोटा और झालावार के अजायबघर में रखी गयी है।यहाँ आज भी राजा भीम दियो द्वारा बनाये गए भीमगढ़ किले के अवशेष मौजूद है। जैन वैष्णव देवताओं और भगवान शिव को समर्पित मंदिर हैं।
ब्राह्मणी माताजी मंदिर
बारां से 20 कि.मी दूर सोर्सन गाँव में ब्राह्मणी माताजी का मंदिर है। प्राचीन किले के अन्दर बने इस मंदिर में, ब्राह्मणी माँ की मूर्ति है, जो बड़ी सी चट्टान के नीचे गुफा में स्थित है। कहा जाता है कि मंदिर में जल रही अखंड ज्योति पिछले 400 सालों से जल रही है।शिवरात्री के दिन यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है और भारी संख्या में पशुओं की बिक्री होती है।
मनिहार महादेव मंदिर
मनिहार महादेव मंदिर बारां से 3 कि.मी दूर बना प्राचीन मंदिर है। 600 साल पुराने इस मंदिर में महादेव और हनुमान की प्रतिमा सिद्ध है। मंदिर के पास के तालाब और यहाँ कि प्राकृतिक सुन्दरता इसकी खूबसूरती को निखारते हैं।यहाँ शिवरात्री का त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। यहाँ के जिला प्रशासन ने इसकी देख रेख का जिमा संस्था धर्मदा को सौंपा है।
कपिलधारा
बारां से 50 कि.मी दूर कपिलधारा, प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट है। यह बहुत सुन्दर स्थान है और गौमुख से बहता निरंतर पानी इसे और भी श्रेष्ठ स्थान बनता है।यह प्रसिद्ध झरना और यहां एक गौमुख से बहने वाला पानी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
भांड देवरा मंदिर
बारां से 40 कि.मी दूर रामगढ पहाड़ी पर भांड देवरा मंदिर सिद्ध है। 10वी सदी में बना यह मंदिर, छोटे से तालाब के किनारे स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर "राजस्थान का खजूराहो" के नाम से प्रसिद्ध है।आज यह मंदिर नवीनीकरण के लिए पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है। रामगढ की इसी पहाड़ी पर किस्ने और अन्नपूर्ण देवी का मंदिर है। गुफा के अन्दर सिद्ध इस मंदिर तक, 750 सीढियाँ चढ़कर पहुँचते हैं, इन सीढियों का निर्माण राजा झाला जालिम सिंह ने किया था।मंदिर में एक देवी की पूजा मेवा और ड्राई फ्रूट्स चढ़कर की जाती है, जब की दूसरी देवी को मांस और शराब का चढ़ाव चढ़ता है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ मेला लगता है जिसे देखने हजारों की संख्या में श्रद्धालू आते हैं।
बिलास्गढ़
बिलास्गढ़, बारां से 45 कि.मी दूर किशनगढ़ में स्थित है। यह खेची साम्राज्य के शासन का प्रमुख स्थान था, पर मुग़ल राजा औरंगजेब ने इसे नष्ट कर दिया। औरंगजेब खेची की राजकुमारी पर मोहित थे और उन्हें जबरन लाने के लिए अपनी सेना भेजी।मुग़ल सेना ने पूरे शहर को तबाह कर दिया, इस पीड़ा में राजकुमारी ने बिलासी नदी में कूद कर अपनी जान दे दी। इस हादसे के बाद इस स्थान को कन्यादेह कहा जाने लगा।
तपस्वियों की बगीची
तपस्वियों की बगीची शाहबाद जिले का सुन्दर पिकनिक स्पॉट है। पहाड़ों के बीच बसा यह स्थान बहुत आकर्षक है। यहाँ शिव लिंग और नदिया की प्रतिमा स्थापित है। यहाँ पान की खेती होती थी, जो आज भी कि जाती है। तपस्वियों की बागी का प्रमुख आकर्षण शिवलिंग की बड़ी मूर्ति है
सीताबाड़ी
सीताबाड़ी एक प्रसिद्ध पूजा स्थल है जो बारां से 45 किमी दूर स्थित हैं। आपको बता दें कि इस पवित्र पूजा स्थल पर कई पर्यटक पिकनिक बनाने के लिए भी आते हैं। इस धार्मिक स्थल के बारे में कई लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान राम और सीता के जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। सीताबाड़ी में कई कुंड स्थित हैं जिनमें वाल्मीकि कुंड, सीता कुंड, लक्ष्मण कुंड, सूर्य कुंड के नाम शामिल हैं। सीताबाड़ी में सीताबाड़ी मेले का आयोजन भी किया जाता है।
सोरसन वन्यजीव अभयारण्य
सोरसन वन्यजीव अभयारण्य कोटा से 50 किमी की दूरी पर स्थित है जिसे सॉर्सन ग्रासलैंड के रूप में भी जाना जाता है। बता दें कि यह 41 वर्ग किमी में फैला एक पक्षी अभयारण्य है जिसमें कई वनस्पति, जल निकाय और पक्षी और जानवर देखें जा सकते हैं। सर्दियों का मौसम आते ही इस अभ्यारण्य में वॉरब्लर, फ्लाईकैचर, लार्क, स्टार्लिंग और रोजी पास्टर जैसे प्रवासी पक्षियों के झुंडों को देखा जा सकता है।
सुरज कुंड
सुरज कुंड का नाम सूर्य देव के नाम पर रखा गया है। इस जगह का अपना एक अलग धार्मिक महत्व है जिसकी वजह से भारी संख्या में पर्यटन यहां पर आते हैं। सूरज कुंड चारों तरफ से बरामदे से घिरा हुआ है। कुंड के एक कोने में, एक शिवलिंग स्थापित हैं जहां भक्त पूजा करते हैं। सुरज कुंड लोग अपने स्वर्गवासी संबंधियों की राख को भी विसर्जित करते हैं।
नाहरगढ़ फोर्ट
नाहरगढ़ फोर्ट या किला बारां से लगभग 73 किमी की दूरी पर स्थित है। यह जिले का एक ऐतिहासिक और भावशाली स्थल है। इस किले का निर्माण लाल पत्थर से किया गया है जो मुगल वास्तुकला को प्रदर्शित करता है। नाहरगढ़ फोर्ट और इसके पास की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है।
गुगोर किला
गुगोर किला बारां से 65 किमी दूर स्थित छाबड़ा के पास स्थित एक भव्य किला और एक दर्शनीय पर्यटन स्थल है।


















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